अहिंसा सभागार बना साहित्यिक कृति के विमोचन का गवाह
एल.एन.भटनागर की नाट्यकृति ’’रिश्तों के आवरण’’ का विमोचन
जोधपुर 29 फरवरी। ’’छन्द देवताओं के वचन हैं.., नाटक दृश्य को शब्दों के अन्दर छिपाता है जिसे अभिनेता दर्शकों तक लाने का माध्यम बनता है......, वेदों से पाठ्य, प्राण, अभिनय और रस को मिलाकर नाटक बनता है...’’ यह उद्गार राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली के अध्यक्ष डाॅ. अर्जुनदेव चारण ने लक्ष्मीनारायण भटनागर की नाट्यकृति ’’रिश्तों के आवरण’’ के विमोचन के अवसर पर महात्मा गांधी स्कूल के अहिंसा सभागार में शनिवार को आयोजित विमोचन के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये, कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष रमेश बोराणा ने नाटक को देखने और खेलने वालों की सम्पत्ति बताया।
अवनी संस्था के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में सचिव शब्बीर हुसैन ने बताया कि हरीश देवनानी के स्वागत उद्बोधन से प्रारम्भ हुए कार्यक्रम में डाॅ. सुनील माथुर और रंगकर्मी व प्रधानाचार्य मज़ाहिर सुलतान ज़ई ने कृति और कृतिकार पर पत्रवाचन किया, कृतिकार भटनागर ने नारी की मर्यादा, संस्कारों और भारतीय संस्कृति को जीवित रखने के मूल भाव को दृष्टिगत रखकर नाटक रचने की क्रिया के बारे में बताया, विशिष्ठ अतिथि आकाशवाणी जोधपुर के पूर्व केन्द्र निदेशक अनिल कुमार राम ने कहा कि संस्कारों को आत्मसात करने के लिये उपदेश की नहीं बल्कि व्यावहारिकता पूर्वक देखने की आवश्यकता होती है अरविन्द भट्ट ने पुस्तक की प्रासंगिकता पर टिप्पणी की .
कार्यक्रम में हबीब कैफी, प्रमोद वैष्णव, आशीष चारण, अरू व्यास, ओमकार वर्मा, सईद ख़ान, मुकुट माथुर, मदन बोराणा, विनय प्रकाश, अकमल नईम, रतनसिंह चम्पावत, भवानी सिंह, अजयकरण जोशी सहित रंगकर्मी, साहित्यकार एवं प्रबुद्धजन उपस्थित थे।
तस्वीरों की गवाही
कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी कमलेश तिवारी ने किया तथा शब्बीर हुसैन ने आभार व्यक्त किया।
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UPDATED BY
AKMAL NAEEM SIDDIQUI

















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